
उत्तर प्रदेश के बहराइच में स्थित प्रतिष्ठित राजकीय इंटर कॉलेज बहराइच एक बार फिर सुर्खियों में है। पुरानी जर्जर इमारत को देखते हुए सरकार ने करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत कर नई बिल्डिंग के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराई थी। लेकिन अब उसी निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
प्रधानाचार्य के आरोप: मानक के विपरीत निर्माण?
विद्यालय के प्रधानाचार्य नागेन्द्र कुमार ने आरोप लगाया है कि निर्माण में घटिया ईंट और निम्नस्तरीय सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि कई बार संबंधित निर्माण एजेंसी U.P. सिडको को अवगत कराने के बावजूद सुधार नहीं किया गया।
प्रधानाचार्य का स्पष्ट कहना है यदि निर्माण इसी तरह चलता रहा, तो भविष्य में छात्रों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
जब इमारत की नींव कमजोर हो, तो भरोसा भी दरकने लगता है।
करोड़ों का बजट, लेकिन क्वालिटी पर प्रश्न
सरकार की मंशा आधुनिक और सुरक्षित स्कूल भवन देने की है। लेकिन निर्माण एजेंसी पर लापरवाही के आरोपों ने पूरे प्रोजेक्ट को कटघरे में ला खड़ा किया है।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि हाल ही में सरकारी किताबों के कबाड़ी तक पहुंचने के मामले के बाद यह दूसरा बड़ा विवाद है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब प्रशासन क्या करेगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है क्या निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाएगी? क्या गुणवत्ता परीक्षण की स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त होगी? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? फिलहाल मामला तूल पकड़ता जा रहा है और शिक्षा विभाग में हलचल तेज है।
शिक्षा बनाम निर्माण राजनीति
स्कूल सिर्फ दीवारों से नहीं बनते, भरोसे से बनते हैं। यदि निर्माण में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं हुई, तो करोड़ों का निवेश भी बच्चों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पाएगा। जनता की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है।
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